हनुमान जयंती 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री, आरती, मंत्र और व्रत पारण समय

Hanuman Jayanti 2025 | हनुमान जयंती 2025: तिथि, पूजा विधि, मंत्र, आरती और भोग

️ हनुमान जयंती 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त तारीख: शनिवार, 12 अप्रैल 2025 (Saturday, 12 April 2025) पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 12 अप्रैल, सुबह 3:21 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: 13 अप्रैल, सुबह 5:51 बजे शुभ मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:29 – 5:14 अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:56 – 12:48 अमृत काल: 11:23 – 1:11 गोधूलि मुहूर्त: … Read more

पार्वती का जन्म और तपस्या

The Sanatan Dharma

*सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा॥ तेहि कारन हिमगिरि गृह जाई। जनमीं पारबती तनु पाई॥3॥ भावार्थ:-सती ने मरते समय भगवान हरि से यह वर माँगा कि मेरा जन्म-जन्म में शिवजी के चरणों में अनुराग रहे। इसी कारण उन्होंने हिमाचल के घर जाकर पार्वती के शरीर से जन्म लिया॥3॥ *जब तें … Read more

पति के अपमान से दुःखी होकर सती का योगाग्नि से जल जाना, दक्ष यज्ञ विध्वंस

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दोहा : * सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध। सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध॥63॥ भावार्थ:-परन्तु उनसे शिवजी का अपमान सहा नहीं गया, इससे उनके हृदय में कुछ भी प्रबोध नहीं हुआ। तब वे सारी सभा को हठपूर्वक डाँटकर क्रोधभरे वचन बोलीं-॥63॥ चौपाई : * सुनहु सभासद सकल मुनिंदा। कही … Read more

बालकाण्ड सती का दक्ष यज्ञ में जाना

बालकाण्ड सती का दक्ष यज्ञ में जाना

सती का दक्ष यज्ञ में जाना दोहा : * दच्छ लिए मुनि बोलि सब करन लगे बड़ जाग।नेवते सादर सकल सुर जे पावत मख भाग॥60॥ भावार्थ:-दक्ष ने सब मुनियों को बुला लिया और वे बड़ा यज्ञ करने लगे। जो देवता यज्ञ का भाग पाते हैं, दक्ष ने उन सबको आदर सहित निमन्त्रित किया॥60॥ चौपाई : … Read more

बालकाण्ड शिवजी द्वारा सती का त्याग, शिवजी की समाधि

बालकाण्ड शिवजी द्वारा सती का त्याग, शिवजी की समाधि

शिवजी द्वारा सती का त्याग, शिवजी की समाधि दोहा : * परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु।प्रगटि न कहत महेसु कछु हृदयँ अधिक संतापु॥56॥ भावार्थ:-सती परम पवित्र हैं, इसलिए इन्हें छोड़ते भी नहीं बनता और प्रेम करने में बड़ा पाप है। प्रकट करके महादेवजी कुछ भी नहीं कहते, परन्तु उनके हृदय में … Read more

बालकाण्ड सती का भ्रम, श्री रामजी का ऐश्वर्य और सती का खेद

बालकाण्ड सती का भ्रम, श्री रामजी का ऐश्वर्य और सती का खेद

सती का भ्रम, श्री रामजी का ऐश्वर्य और सती का खेद * रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं जेहि पाना॥ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी। महादेव तब कहा बखानी॥4॥ भावार्थ:-श्री रामजी की कथा चंद्रमा की किरणों के समान है, जिसे संत रूपी चकोर सदा पान करते हैं। ऐसा ही संदेह पार्वतीजी ने किया था, तब महादेवजी … Read more

बालकाण्ड याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद तथा प्रयाग माहात्म्य

बालकाण्ड याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद तथा प्रयाग माहात्म्य

याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद तथा प्रयाग माहात्म्य * अब रघुपति पद पंकरुह हियँ धरि पाइ प्रसाद।कहउँ जुगल मुनिबर्य कर मिलन सुभग संबाद ॥43 ख॥ भावार्थ:-मैं अब श्री रघुनाथजी के चरण कमलों को हृदय में धारण कर और उनका प्रसाद पाकर दोनों श्रेष्ठ मुनियों के मिलन का सुंदर संवाद वर्णन करता हूँ॥43 (ख)॥ चौपाई : * भरद्वाज मुनि … Read more

बालकाण्ड मानस का रूप और माहात्म्य

बालकाण्ड मानस का रूप और माहात्म्य

मानस का रूप और माहात्म्य दोहा : * जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु।अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु॥35॥ भावार्थ:-यह रामचरित मानस जैसा है, जिस प्रकार बना है और जिस हेतु से जगत में इसका प्रचार हुआ, अब वही सब कथा मैं श्री उमा-महेश्वर का स्मरण करके कहता हूँ॥35॥ चौपाई … Read more

बालकाण्ड मानस निर्माण की तिथि

बालकाण्ड मानस निर्माण की तिथि

मानस निर्माण की तिथि * सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा॥संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा॥2॥ भावार्थ:-अब मैं आदरपूर्वक श्री शिवजी को सिर नवाकर श्री रामचन्द्रजी के गुणों की निर्मल कथा कहता हूँ। श्री हरि के चरणों पर सिर रखकर संवत्‌ 1631 में इस कथा का आरंभ … Read more

बालकाण्ड श्री रामगुण और श्री रामचरित्‌ की महिमा

बालकाण्ड श्री रामगुण और श्री रामचरित्‌ की महिमा

श्री रामगुण और श्री रामचरित्‌ की महिमा * मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि देखि दयानिधि पोसो॥2॥ भावार्थ:-वे (श्री रामजी) मेरी (बिगड़ी) सब तरह से सुधार लेंगे, जिनकी कृपा कृपा करने से नहीं अघाती। राम से उत्तम स्वामी और मुझ सरीखा बुरा सेवक! इतने पर भी … Read more